J Krishnamurti कविता : दुरी बनाये रखना।

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तुम्हे ज्यादा यहाँ नहीं होना चाहिये ,इतनी दुरी बनाये रखो ,

कि वह तुम्हें ढूंढ ना सके, आकार ना दे सके, ढाल ना सके,

इतनी दूरी बनाए रखो, जैसे हीमालय जैसे ताजी हवा,

दूरी इतनी बनाए रखो कि ना हो मां बाप ना रिश्ते ना परिवार ना देश,

दूरी इतनी बनाए रखो कि तुम्हें भी ना पता हो तुम हो कहां,

उन्हें ढूंढने ना दो स्वयं को मत आना करीब उनसे,

दूरी इतनी बनाए रखो कि स्वयं को भी ना खोज सको,

दूरी इतनी रखना कि जो कभी ना पार हो सके,

एक रास्ता खुला रखना जिससे कोई ना आ सके,

बंद मत करना दरवाजा इसलिए कि नहीं है वहां कोई दरवाजा,

बस एक खुला अंतहीन रास्ता अगर कोई दरवाजा बंद किया तो,

वह तुम्हारे करीब होंगे तब तुम खो जाओगे,

दूरी इतनी बनाए रखना कि क्योंकि वें तुम तक ना पहुंचे,

उनकी महक बहुत दूर बहुत गहरे तक जाती है उन से दूषित मत होना,

उनके शब्दों से, उनके हाव-भाव से,उनके अत्याधिक ज्ञान से,

दूरी ईतनी बनाए रखना।, स्वयं को इसलिए कि वह तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं,

हर मोड़ पर, हर घर में. तुम्हें आकार देने के लिए तुम्हें ठालने के लिए,

तुम्हें टुकड़ों में तोड़ देने के लिए और फिर टुकड़ो को,

अपनी तरह से जोड़ने के लिए,उनके भगवान छोटे और बड़े उनकी ही तरह है,

उनके मन हाथों से ठल रहे हो, तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं,

पादरी और साम्यवादी, आस्तिक और नास्तिक दोनों एक हैं,

उनको लगता है वह दोनों अलग है,पर वह दोनों एक जैसे हैं,

इसलिए कि वह तुम्हारा मन परिवर्तन करेंगे, जब तक तुम उन में से एक ना हो जाओ, जब तक तुम उनके शब्द ना दोहरा औ, जब तक तुम उनके नए पुराने संतों की पूजा ना करो, उनके पास सेना है, देश और भगवान के लिए और भी माहिर हैं,

हत्या करने में, दूरी बनाए रखो कि पर वह तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं,

वह आचार्य, वह व्यापारी एक तैयार करता है तुम्हे,

दूसरे के लिए उनके समाज की मांग के अनुसार होने में,

जो एक खतरनाक है ,उनकी रचना है धर्म और साम्प्रदाय ,

यह दोनों उनके असल भगवान है,

वह तुम्हें बनाएंगे वैज्ञानिक इंजीनियर बनाएंगे किसी भी चीज़ में माहिर भोजन बनाने से,

आर्टिटेक्चर और दूरी इतनी बनाए रखना तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं ,

वह नेता, वह समाज सुधारक, एक तुम्हें नीचे नाली में खींचता है ,

और दूसरा सुधारता है, शब्दों से खेलते हैं<

और तुम उस जंगल में खो जाओगे दूरी बनाए रखना।,

तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं ईश्वर के ज्ञानी और बम फेंकने वाले एक तुम्हे समजायेंगा और दूसरा दिखाएगा कत्ल कैसे करते हैं,

इतने सारे तरीके हैं ईश्वर को पाने के और इतने सारे ढेरों तरीके हैं

कत्ल करने के, इन सबसे अलग और बहुत लोग हैं,

तुम्हे यह बताने के लिए कि तुम्हें क्या करना है,क्या नहीं करना,

दूर रहना उन सब से तुम्हें भी पसंद आएगा उन सबके साथ खेलना,

जो तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं,

और फिर खेल इतना जटिल और बहलाने वाला हो जाएगा कि तुम खो जाओगे,

तुम्हें यहां ज्यादा नहीं रहना चाहिये, दूरी इतनी बनाए रखो कि तुम स्वयं को भी ना खोज

सको तुम्हें ज्यादा यहां नहीं होना चाहिए ,इतनी दूरी बनाए रखो

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7 thoughts on “J Krishnamurti कविता : दुरी बनाये रखना।

  1. यही है कृष्णमूर्ति जी का वास्तविक फ्रीडम

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