मृत्यु पर अधिकार

“सूत्र : ललाट के मध्य में प्राण को टिकाओ । जब वह सोने के क्षण में हृदय तक पहुंच जायेगा ,तब स्वप्न और मृत्यु पर आपका अधिकार हो जायेगा। “

विज्ञानं भैरव सूत्र की यह एक शक्तिसाली विधि है।

अगर आपने तीसरे नेत्र पर कोई भी काम किया है। तो आप ललाट के मध्य में प्राण को सहजता से जान लेंगे। तब आप यह भी जान लोगे की वह ऊर्जा और प्रकाश बरसता है।

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जब यह हृदय तक पहुंचती है। जब यह वर्षा तुम्हारे भीतर तक पोहोचेगी। सोने के क्षण में तभी आप स्वप्न और मृत्यु पर स्वयं का अधिकार पाओगे।

यह विधि सोने के वक्त की जाती है।

अपनी श्वासो-श्वास में उसका सूक्ष्म , अदृश्य ,अपार्थिव अंश प्राण है। उसे जानना ,उसे भुकुटियो के बिच अवधान को स्थित कर आसानी से जाना जाता है। यदि तुम प्राण को अपने भीतर प्रवाहित होता अनुभव कर सको , तो तुम यह भी जान सकते हो की कब तुम्हारी मृत्यु होगी, यह आसान है। क्योकि यदि तुम प्राण के प्रवाह को जानते हो तो त्तुम्हारी मृत्यु से छह महीने पहले ही प्रक्रिया उलट जाती है

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जब तुम नींद में उतर रहे हो। तभी इस विधि को करना है। तुम नींद में उतर रहे हो। धीरे धीरे नींद तुम पर हावी हो रही है। क्षणो के भीतर तुम्हारी चेतना लुप्त होगी। तुम अचेतन हो जाओगे इस क्षण के आने से पहले तुम अपने श्वाश और उसके स्क्षूम अंश प्राण के प्रति सहज हो जाओ। और उसे हृदय तक जाते हुआ अनुभव करो। अनुभव करे की वो हृदय तक जा रहा है पाओगे की तीन सप्ताह की साधना से अपने स्वप्न और मृत्यु पर अधिकार कर लिया है।

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