भय क्या है ?(What is fear?)

भय किसी न किसी वात का होता है,भय का अलग अलग अस्तित्व नहीं होता ,भय का मुल अस्तित्व एक ही होता है, भय की बात करते ही मृत्य की बात सामने आती है,आप को किसी ऐसी चिज का भय कैसे हो सकता है जिसे आप जानते ही नहीं ?भय आपको केवल उसी का हो सकता है जिसे आप जानते है, मृत्य अज्ञात है , अज्ञात से भय नहीं हो सकता,भय हमेशा ज्ञात के खोनेसे होता है। ज्ञात अपनी सभी चीजोसे,संबंध,रिस्तोसे,ज्ञात विचारों से,ज्ञात विस्वासो से, ज्ञात धारणा इण सभी के खोनेसे भय होता है ,आपका भय हमेशा ज्ञात के संबंध मे होता है,अज्ञात के नहीं।

ज्ञात के भय से कैसे मुक्ति पायी जाय,अपने परिवार ,अपनी प्रतिष्ठा,अपने चरित्र,अपने बैंक बेंलेन्स,अपनी भुख,लालसा आदी के खो देनेके भय से कैसे मुक्ति पायी जाय? आप कह सकते है कि भय अंतरात्मा से पैदा होता है,परंतु आपकी अंतरात्मा तो  संस्कारों से निर्मित हुई है, इसलिए वह ज्ञात काही परिणाम है।

मै ज्ञात से भयभित हु, इसका अर्थ है कि मै व्यक्तियों , वस्तुओ अथवा विचारों को खो देने से डरता हु,अपनि असलियत को जानने से भयभित हुं,मेरा विस्वास,मेरा अनुभव ,मेरा संस्कारोका विशेष ढांचा,इन सबसे मेरी एक पहचान बनी है उसे खोने का डर रहता है,आप संन्तो के वचन,उपनिशद के वचनो पर विस्वास कर तादात्म्य कर अपने डर से पिछा छुडाना चाहते है और करते भी है,कुछ समय आपको संन्तोष भी होता है, संन्तो के वचनो को हमे प्रत्यक्ष भी करना होगा,मेरे प्रत्यक्ष का मतलब है माध्यम के बगैर जानना,\

आत्मरक्षा के भावना से भय पलायन के अनेक रास्ते खोज लेता है,तादात्म्य उनमे से आम रास्ता है,क्या अब हम समज पा रहे है कि भय क्या है? ज्ञात के भय से मुक्त होना हो तो आप को जो है ,का प्रत्यक्ष बोध होना जरुरी है,जब तक आप जो है, मे ठहेर नहीं जाते तब तक आप भय से मुक्त नहीं हो पायेगे,जब जो है का प्रत्यक्ष बोध होता है………

तो कोई मै नहीं रहता ,जब मै नहीं तो खोनेका कोई सवाल नहीं और भय का कोई सवाल नहीं,जो है, का प्रत्यक्ष बोध आप को संस्कारो से , ज्ञात से , अनुभव से , विश्र्वासो से,तादात्म्य से,धारणाओ से,मुक्त कर देता है,मै से मुक्त कर देता है,ओर सारे बंधनो का कारण मै है,तो एक मात्र रास्ता है जो है, उसका प्रत्यक्ष बोध और उसके पार चले जाना।

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पोस्ट अनिल स्वामी

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